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नव योगिनी तन्त्र | Nav Yogini Tantra

SHD-9788186336151
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महिलायों के लिए योग साधना पद्धति

नव योगिनी तंत्र में आज के समाज की बदलती परिस्थितियों के सन्दर्भ में स्त्रियों की आवश्यकताओं एवं बहुआयामी समस्याओं के योग सम्मत समाधान हेतु विस्तृत परामर्श सुझाए गए है| प्रत्येक नारी की अनूठी जीवन - यात्रा से सम्बंधित विविध पहलूयों पर व्रहत सिंहावलोकन प्रस्तुत किया गया है और नारी के विविध रूपों एवं बहुविध भूमिकाओं से अवगत कराने की चेष्टा भी की गयी है | इसमें देवी, किशोरी एवं पूर्ण विकसित नारी के वर्तमान रूप की झांकी आपको प्राप्त होगी|

इस पुस्तक में आप नारी शरीर विज्ञानं, नारी मनोविज्ञान, सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहलू, विवाह, एकल नारी - जीवन एवं संन्यास - जीवन आदि विभिन्न शीर्षकों के अंतर्गत समग्र दृष्टि से नारी-जीवन का विश्लेषण पायेंगे| इसमें रज: स्त्राव, गर्भावस्था, राजोनिव्रती, अवसाद, पीठ-दर्द, वजन की समस्याओं से निबटने हेतु योगाभ्यास - कार्यक्रम सुझाया गया है| प्रारम्भिक, मध्यवर्ती एवं उच्च स्त्तरीय योगाभियासियों के लिए साधना का सामान्य मार्गदर्शन प्रदान किया गया है और रेखा - चित्र भी दिए गए है|

This book is written exclusively for women from the outlook of a woman. The first section, on spirituality, describes the important role of women in social and spiritual evolution, and traces their development from menarche to menopause. The second section discusses special applications of yoga for backache, depression, menstrual irregularities, pregnancy, prolapse, overweight and others. Each chapter inspires the woman to help heal herself and regain her divine power through the practices of yoga. The third section deals with yoga sadhana and includes a guide to yogic practice, explaining where, how and when to practice. Techniques are divided into three levels: beginners, intermediate and advanced. Important reference for yoga teachers.

Subject Yoga
Selling Rights Worldwide
Packing Weight 1 kg
ISBN 9788186336150
Author स्वामी मुक्तानंद
Publisher Yoga Publications Trust, Munger, Bihar
Language Hindi
Page count 250
Book Format Paper Back

Categories: Bihar School of Yoga Hindi Books [ हिन्दी किताबें ]

Tags: self help yoga

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